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हंसराज कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय एवं डी.ए.वी. संस्था का एक प्रतिष्ठित संस्थान है। सन् 1948 में महात्मा हंसराज के नाम पर स्थापित इस कॉलेज ने लगभग 72 वर्षों का सफ़र तय करते हुए भारतीय संस्कृति, शिक्षा एवं मानवीय मूल्यों के उन्नयन के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। कॉलेज द्वारा युवा पीढ़ी को शिक्षित करने के साथ-साथ समकालीन चुनौतियों का सामना करने के लिए समय-समय पर अनेक रचनात्मक कार्यक्रमों एवं संवाद-परिसंवाद आदि का आयोजन किया जाता रहा है। हंसराज कॉलेज में कला, वाणिज्य, विज्ञान सभी संकायों के अनेक पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। इस कॉलेज के पूर्व विद्यार्थी ज्ञान-विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उल्लेखनीय भूमिका निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में निरंतर महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इंडिया टुडे सहित विभिन्न सरकारी तथा गैर सरकारी एजेंसियों के द्वारा की गई रैंकिंग में हंसराज कॉलेज लगातार देश के शीर्ष कॉलेजों में शुमार रहा है। अकादमिक प्रदर्शन, उच्च गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों सहित सभी मोर्चों और मानकों पर हंसराज कॉलेज निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

आज जिस बहुध्रुवीय नई दुनिया में हम रह रहे हैं वह तकनीक संचालित और तीव्र गति से परिवर्तनशील है। आज की इस दुनिया में पर्यावरण संबंधी चिंताएं पहले से कहीं अधिक केंद्र में है। वैश्विक आतंकवाद आज भी एक प्रमुख चुनौती है। मुक्त बाजार और भूमंडलीकरण से उत्पन्न नई परिस्थितियों में दुनिया के देशों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान का वातावरण पहले से काफी बेहतर हुआ है। आज साझा सहयोग और समन्वय की पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है। ऐसे में भारत जैसे बड़े और जिम्मेदार देशों की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस सन्दर्भ में पूरी दुनिया एशिया विशेषकर भारत को 21वीं सदी की आशा के पुंज के रूप में देख रही है और भारत इस भूमिका को बड़ी शिद्दत से निभा भी रहा है। इस क्रम में विश्व के सभी मंचों और समूहों के जरिए समकालीन वैश्विक चुनौतियों और चिंताओं के समाधान में आने वाले गतिरोधों को दूर करने में भी भारत की सक्रियता में लगातार अभिवृद्धि हुई है। हाल के वर्षों में भारत की इस भूमिका के कारण विश्व मंच पर इसकी साख और धमक बहुत तेजी से बढ़ी है। अलबत्ता दुनिया पर अपनी छाप छोड़ने के लिए यह जरुरी है कि भारत अपनी सभ्यता, संस्कृति और भाषाई वैशिष्ट्य से दुनिया के तमाम देशों को परिचित कराए। यही कारण है कि आज भारत पुनः विश्व गुरु के अपने गौरव और गरिमा की तलाश में बड़ी तेजी से सक्रिय दिखाई देता है। अपनी संस्कृति, सभ्यता, इतिहास और भाषा के प्रति एक विशिष्ट एवं गौरवपूर्ण भावबोध से युक्त भारत को आज पूरी दुनिया देख रही है। इस नए और बदले हुए भारत के संकल्पों को इसकी सिद्धि तक पहुँचाने के लिए हिंदी के विकास और विस्तार को लेकर गंभीर प्रयास की भी बेहद जरुरत है।

हिंदी आज देश ही नहीं दुनिया की सर्वाधिक प्रमुख भाषा के रूप में प्रतिष्ठित है। हिंदी भारतीय संस्कृति और परंपरा की वाहक रही है। दुनिया भर में फैले भारतवंशी प्रवासियों ने इसे और भी सुदृढ़ और सशक्त बनाने का कार्य किया है। वैश्वीकरण के बाद तकनीक के बढ़ते प्रयोग और प्रभाव ने हिंदी को और भी गतिशील एवं प्रभावशाली बनाया है। हिंदी भाषा अपने विविध आयामों के साथ आज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में पहले से कहीं अधिक दखल रखती है। सिनेमा, न्यू मीडिया, अनुवाद, राजभाषा, प्रदर्शनकारी कला, लोक प्रशासन, विज्ञापन, बाजार व उद्यम, पत्रकारिता, ज्ञान-विज्ञान, लोकसाहित्य, लोकप्रिय साहित्य, पर्यावरण सहित सभी समकालीन विषयों और क्षेत्रों में जारी चर्चा-परिचर्चा और संवाद आज प्रमुख रूप से हिंदी भाषा और माध्यम में होती हुई दिखाई दे रही है। इसी को नए उत्कर्ष तक ले जाने के ध्येय से हंसराज कॉलेज द्वारा 10-11 जनवरी 2020 को विश्व हिंदी दिवस के सुअवसर पर अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है जिसका केन्द्रीय विषय ‘नई दुनिया, नया भारत, नई हिंदी’ है। इस सम्मेलन के जरिए देश-विदेश के हिंदी प्रेमी विद्वान-विशेषज्ञों के माध्यम से हिंदी भाषा के विविध आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श एवं संवाद का वातावरण निर्मित करने की कोशिश होगी। इसके साथ ही हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपनी विशेष भूमिका निभाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के योगदान एवं सक्रियता को भी रेखांकित किया जाएगा।

सम्मेलन का केन्द्रीय विषय
नई दुनिया, नया भारत, नई हिंदी

उपविषय

  • डिजिटल दुनिया, डिजिटल हिंदी
  • हिंदी शिक्षण का वैश्विक परिदृश्य
  • हिंदी का बाजार एवं उद्यम संवाद
  • हिंदी सिनेमा और गीत-संगीत का वैश्विक परिदृश्य
  • हिन्दी अनुवाद: स्थिति और चुनौतियाँ
  • लोक प्रशासन और भारतीय भाषाएँ
  • हिंदी भाषा और साहित्य: इस पार, उस पार
  • हिन्दी का प्रसार और प्रदर्शनकारी कला
  • राष्ट्र निर्माण में भाषा का महत्व और राजभाषा हिन्दी
  • न्यू मीडिया और नई वैश्विक संस्कृति
  • विज्ञापन की दुनिया और हिन्दी
  • हिन्दी प्रकाशन: सरोकार और चुनौतियाँ
  • लोकप्रिय साहित्य, लोक साहित्य और हिन्दी
  • हिन्दी में रोजगार की संभावनाएँ और नवाचार
  • हिन्दी की लघु पत्रिकाओं का अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
  • भारतीय संस्कृति, मूल्यबोध एवं विश्व मानवता
  • हिंदी माध्यम कार्यान्वयन, तकनीकी एवं पारिभाषिक शब्दावली
  • विज्ञान, पर्यावरण और हिन्दी

पंजीकरण

इस सम्मेलन में भागीदारी के इच्छुक प्रतिनिधि पंजीकरण शुल्क का भुगतान कर https://bit.ly/32VIUIP लिंक पर जाकर निर्दिष्ट फॉर्म को भरकर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। पंजीकरण की अंतिम तारीख 10 दिसंबर, 2019 है।

पंजीकरण शुल्क

संस्थाओं के लिए - 3000/-
प्राध्यापक - 1500/-
शोधार्थी - 700/-

शोध आलेख हेतु निर्देश

अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधि / प्रतिभागियों से सम्मेलन के केंद्रीय एवं उपविषयों से संबंधित बिंदुओं पर शोध आलेख आमंत्रित हैं। आप अपने शोध अालेख 2500-3000 शब्दों में यूनिकोड फॉन्ट (वर्ड फाइल) में 10 दिसंबर 2019 तक hrcinternationalconference@gmail.com पर अवश्य भेज दें। किसी भी स्थिति में पीडीएफ/स्कैंड फाइल स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी चयनित शोध आलेख ISBN No. के साथ पुस्तकाकार प्रकाशित किए जाएंगे।

पंजीकरण के लिए शुल्क भुगतान की प्रक्रिया

इच्छुक प्रतिनिधि ब्रोशर में दिये गये बैंक विवरण के अनुसार पंजीकरण शुल्क का ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं । आप अपना UTR No./ REFERENCE No. सुरक्षित रखकर पंजीकरण फॉर्म में जरुर दर्ज करें। ऑनलाइन भुगतान की जगह आप अपनी सुविधानुसार किसी भी कार्य दिवस में हंसराज कॉलेज कार्यालय में आकर भी अपना पंजीकरण करवा कर रसीद प्राप्त कर सकते हैं।

ACCOUNT NAME - PRINCIPAL HANSRAJ COLLEGE
ACCOUNT No. - 2848101019583 (SAVING)
IFSC - CNRB0002848
BRANCH - HANSRAJ COLLEGE,MALKA GANJ,DELHI-07

प्रो. रमा
मुख्य संयोजिका

निर्दिष्ट दूरभाष नंबर या मोबाईल नंबर पर संपर्क करें -
8920116822, 9871907081, 9968993201, 9205828219

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